बस्ती नई भी नहीं थी और ज़्यादा पुरानी भी नहीं हुई थी। काफ़ी बसावट हो गयी थी फिर भी बहुत से भूखण्ड निर्माण का इंतज़ार कर रहे थे। सम्पन्न लोगों ने वो इन्वेस्टमेंट के नाम खरीदे थे। स्थानीय निकाय के क़ानूनी प्रावधानों में एक यह भी था कि दो वर्षों तक कोई निर्माण न किये जाने पर आवंटन रद्द भी किया जा सकता था। परन्तु कई बार ऐसा लगता है कि कई चीज़ें घर पे लाके रख ली जाती हैं कि वक्त ज़रूरत काम आए पर आती नहीं हैं। घर के लोगों को ये निश्चिन्तता होती है कि हाँ ये या वो काम आ सकती है। ख़ाली भूखण्ड रहने वाले लोगों के लिए क्लेश का कारण होते क्योंकि नज़र बचाकर आने जाने वाले कचरा धीरे से सरका जाते आते जाते। नई बिछाई सीवरेज पाइपें भी कोढ़ में खाज का काम करतीं। मैनहोल के ढक्कनों पर पास की कच्ची बस्ती के नशेड़ियों की नज़र पड़ चुकी थी। रोज़ आते जाते उनकी तरक़्क़ी दिख जाती काम की। रात को कोई देख न ले तो आसपास की स्ट्रीट लाइट की ट्यूब्स भी वे पत्थरों से फोड़ने लगे थे। अगले दिन तार भी इस तरह निकले थे कि कोई रात में वाहन चालक दुर्घटना का शिकार हो सकता था। फिर भी कॉलोनी को पॉश कॉलोनी कहा और समझा जाता था। सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले अधिकारी कर्मचारी रहते थे अधिकतर। चाहे वे खुद के मकान में रहें या क्वार्टर्स में। आवारा पशुओं में ज़्यादातर छोटे बच्छे या सांड गोधे होते जिनसे बच्चों बुजुर्गों और वाहन सवारों के चोटिल होने का भय सदा बना रहता था। पिछले दो दशकों से हर जीव का जीवन ज़्यादा कीमती हो गया था सिर्फ मनुष्य की जान सस्ती हो गयी थी। सड़क किनारे गायों को घायल देखकर भीड़ इकट्ठी हो जाती थी पर कोई व्यक्ति पड़ा हो तो आसपास से लोग उसे नशेड़ी भंगेड़ी समझ कर निकल जाते थे। सर्दी की ताब न सहकर पिछले कई दिन से बीमार बच्छा मर गया था। स्थानीय निकाय को फ़ोन करने पर भी उसे कोई न लेने आया। सभी को बहुत व्यस्तता होती है। चौबीस घण्टे चौकीदारा कौन कर सकता है। रात में कुत्तों ने आपस में लड़ लड़ कर उसका भोज किया। सुबह की सैर को जाने वाले कुछ लोग पत्थर मार कर उन्हें भगाने की कोशिश करते। उनके आगे जाते ही कुत्ते हड्डियां चबाने फिर पहुँच जाते। बेटा बोला पापा दो दिन से बारह बजे के आसपास कई गाय गोधे यहां आ जाते हैं और गाय ज़ोर ज़ोर से बां बां करती है। अख़बार पढ़ते कुछ लोग आ गए। हम मंदिर बनाने के लिए आये हैं आप कितना सहयोग करोगे। कभी उन्हें और कभी सामने हड्डियां चबाते कुत्तों को देखकर काफी कुछ अंदर घुमड़ रहा था पर इतना ही कह पाया। अगले सन्डे तक सोच के बताऊंगा।©
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