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yadavinod

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रविवार, 15 मार्च 2015

बारिश के बाद टिब्बे और उनकी बाळू बड़ी भाती। छुट्टी का दिन था। चलो आज उधर घूमने चलते हैं।  खाने पीने के कुछ पकवान घर बनाये बाक़ी रास्ते में पाउच पैकेट्स बोटल्स लिए।
सुथरे टिब्बे। सुनहरी रेत। सबकुछ साफ़ शफ़्फ़ाक़। शाम तक गाना बजाना खाना पीना। मोबाइल फ़ोन्स के साथ साथ घूमने सैर करने वालों की भी बैटरी डाउन होने लगी थी।
चलो भई अँधेरा होने चला है।
और पीछे छोड़ चले थे, पाउच बोटल्स और प्लास्टिक ... जिनका क्षय पता नहीं कभी होगा भी या नहीं।। कभी न गलने वाले।©

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