आने वाली फ़सल के दृष्टिगत सरकारी निगम के इधर के गोदामों से अनाज माल गाड़ियों से ढुलाई के लिए रेल विभाग के माल गोदामों तक ट्रैक्टर ट्रॉली से ढोया जाता था। रास्ते में खुली फटी बोरियों के कारण काफ़ी दाने रास्ते में गिरते जाते थे। सामने की दूकान के रोशनदान में बने घोंसले में रह रहे कबूतरों के जोड़े को इधर सामने ही खाने का प्रबन्ध हो जाता था सड़क के बिखरे दानों से। धीरे धीरे सड़क पे आने जाने वाले वाहनों का डर निकलने लगा था। उन्हें लगता था कि उन्हें अंदाज़ा हो जाता था कि दाने चुगते हुए कब दाएं या बाएं कलाबाज़ी खाते हुए उड़ जाना है। तैरने वाले ही डूबते हैं। गिरते हैं शह सवार ही मैदान ए जंग में वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं जैसी कहावतें यूं ही नहीं बन जाती हैं। दाने चुगते हुए दोनों में से एक तो बाएं कलाबाज़ी लेते उडारी मार गया पर दूसरा दूसरी तरफ से आ रही कार की चपेट में आ गया। वाहनों की आवाजाही से सड़क जब भी कुछ लम्हों के लिए मुक्त होती तो ताज़ा बिछुड़े साथी की पार्थिव देह के पास बार बार जाकर चक्कर लगाकर बचा हुआ साथी जैसे उसके चले जाने का कारण ढूंढ रहा था।©
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