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बुधवार, 25 फ़रवरी 2015

सड़क सर्कस नहीं
रंगमंच भी नहीं
इस पर करतब
दिखाने की
ज़रूरत भी नहीं
फिर भी रोज़
दीख जाते हैं
अनगिन नज़ारे
मुझे देखो  मैं भी हूँ
की पुकार सा करते
मशीन की शक्ति को
खुद की समझने की भूल
गति का रोमांच
धरती पे ना हो पांव
यों उड़ने का अहसास
क़ानूनी प्रावधान को धता
देख कर भी मींच ली
जाती है आँख
फेर ली जाती हैं नज़रें
हमने क्या लेना का सा भाव
लैंगिक भेद से ऊपर उठी
अजीब सी आदतें
रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में
शुमार हो जाती हैं
फिर किसी को इस पर
प्रतिक्रिया नहीं भाती
हाकिम भी सोचते
समझदारी से आ जायेगी
सड़क पर चलने की जुगत
सुरक्षित जीवन सर्वोपरि
सन्देश ज़रूरी है
कि
जीवन से बड़ी पहेली नहीं
सड़क किसी की सहेली नहीं©
(सड़क सुरक्षा सप्ताह पर सर्व सुरक्षा की कामना )

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