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yadavinod

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बुधवार, 31 दिसंबर 2014

तारीख़ के साथ
तवारीख़ भी बदले
ख़ुशहाल हों वे
अभी तलक
जिनके हालात न बदले
पेट भरें उनके
अभी भी पड़े जिन्हें
रोटी के लिए लाले
पढ़ लें दो आखर
जो कचरा चुनने वाले©

आया नया साल
हो रहा धमाल
क्लबों में डांस
सुरा पान
हुल्लड़ से
हासिल क्या
कुछ समझो मेरे लाल
मार्केटिंग का कमाल
चूस के फेंक देंगे
कर के गोज से कंगाल©

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