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yadavinod

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सोमवार, 29 दिसंबर 2014

हद से अब गुज़र गयी
मन जो बसी हैं सेल्फियां
बौरा गए हैं मतवाले
ले रहे हैं सेल्फियां
सोते जागते जूनून इक
कैसे हों सिर्फ सेल्फियां
घर दफ्तर या सफ़र में हों
बेचैन... लें बस सेल्फियां
होड़ सी मची है कैसे
हट के हों मेरी सेल्फियां
गुसल तक भी पहुंच गयी
निजता तोड़े सेल्फियां
ख़ुशी की दरकार सच
दुःख में भी लेरे सेल्फियां
उनको मदद की थी चाहत
मैं लेता रह गया सेल्फियां©



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