हिलोर
हिलोर समीक्षा बैठक के लिए तिलोनिया [अजमेर ] २०-८-९७ को जाना था| एस डब्लू आर सी , पुराना कैम्पस में यह बैठक रखी गयी थी |
१९-८-९७
जब ऑफिस से रिलीव होकर घर आया तो रजनी बीमार थी| मिन्कल की तबियत आज ठीक थी| मनोज जोधपुर जाने की तैयारी में था तो मै भी उसी गाडी जम्मू तवी एक्सप्रेस से मेड़ता की |गाड़ी साढ़े तीन घंटे देरी से थी| परेशानी महसूस हुई| मनोज से मेड़ता की टिकट [८८ रु] मंगवाई| साढ़े दस बजे गाडी आई| मनोज उदास लग रहा था| उसके साथी प्लेटफार्म पर इंतज़ार कर रहे थे| पांच मिनट बाद गाडी रवाना हुई | एक औरत-बच्चों के साथ वाले की बी एस एफ़ के जवान से ऊपर की बर्थ को लेकर झड़प हो रही थी, भारत की सभी ट्रेनों में विशेष कर सीटो को लेकर तू-तू , मै-मै, झगडा, यहाँ तक की हाथा पाई आम बात है| कुछ यात्री अमरनाथ यात्रा से बीकानेर लौट रहे थे उनसे यात्रा के बारे में जानकारी प्राप्त की|
२०-८-९७
गाड़ी ३ बजे बीकानेर पहुंची| मनोज को उठा कर ऊपर वाली ख़ाली हुई बर्थ पर सोने को कहा जो पहले नीचे की बर्थ पर अपने एक साथी के साथ था| मै भी ऊपर की एक और बर्थ पर लेट गया| गाड़ी सवा छः बजे मेड़ता रोड पहुंची|मेरे साथ कोई पीलीबंगा का रहने वाला अजमेर विजया बैंक में कार्यरत लड़का साथ हो लिया|उसके साथ मेड़ता रोड बस अड्डे पर पहुंचा , चाय पी और एक प्राइवेट बस से [५ रु] मेड़ता सिटी आये| तब तक साढ़े सात बज चुके थे | वाहन से अजमेर के लिए [२० ru ] साधारण बस पकड़ी | मेड़ता सिटी से चलते हुए चालक ने पिछली टयूब में हवा भरवाई थी, पर पता चला कि टयूब पंक्चर है |अजमेर की ओर जाने वाली प्राइवेट बस में कंडक्टर ने हमें चढ़वाया| चूँकि बस प्राइवेट बस अड्डे पर पहुंची इसलिए वाहन से टैम्पो से [२ रु] रोडवेज़ अड्डे आया | वहां पूछ्ताछ से पता करने पर तिलोनिया के लिए ७ नंबर बुकिंग काउंटर से एक बजे बस बताई| बड़ा परेशान हुआ क्योंकि नहाना -धोना न हो पाने के कारण तबियत कुछ ढीली महसूस हो रही थी| फिर पौने दो घंटे का इंतज़ार मुश्किल लग रहा था| पर कोई उपाय नहीं था और लेट होने का अपराध बोध भी था| खाने के विकल्प के रूप में एक गिलास जूस पिया| जब एक बजे काउंटर के पास कोई बस नहीं दिखी तो पूछने पर पता चला कि बस बाहर ग्रामीण सेवा अड्डे से जायेगी| अजमेर-हरमाड़ा बस में बैठा| १-२० पर बस चली | अजमेर से बाहर की ओर निकलते हुए मूसलाधार बारिश शुरू हो गयी| तिलोनिया की स्थिति के बारे में बड़ा ही परेशान था| जिसके बारे में अब पता चला कि अजमेर-जयपुर मार्ग पर किशनगढ़ से जयपुर कि ओर कुछ दूर चलने के बाद बस बायीं ओर लिंक रोड पर चली| उस मोड़ को पाटन मोड़ कहते हैं| कुछ देर बाद एस डब्लू आर सी [सोशल वेलफेयर रिसर्च सेंटर] का नया कैम्पस वहां दिखा| पूछने पर पता चला कि ओल्ड कैम्पस आगे है| वहां उतरा| उतरते ही तिलोनिया रेलवे स्टेशन के नाम पट्ट दिखाई दिए | शेखर, राजेश और प्रशांत ने देरी का कारण पूछा | बताया कि यहाँ पहले आया नहीं हूँ और अजमेर से साधन सीमित हैं| ग्यारह बजे अजमेर में था फिर भी अनावश्यक देरी हो गयी| खैर, उसी समय 'हिलोर' के विश्लेषण के लिए दलीप और चाकसू से आई शैलजा शर्मा [एम् टी] के साथ देरी का मेक अप करने की कोशिश की|चार बजे की चाय के बाद सभी बैठे और पहले दो दिन के माडयूल कार्यक्रम की समीक्षा की| इसी दौरान बाहर तेज़ बारिश होती रही और बाहर रखी जूतियाँ भीग गयी|करीब साढ़े छः बजे तक बैठक चली | बादलों के कारण घुप्प अँधेरा हो आया था | दलीप और नय्यर के साथ स्टेशन की ओर टहलने निकला| लौट कर खीर,रोटी और भिन्डी की सब्जी खायी| कल रात की नींद ,आज का नहीं नहाया शरीर और पसीने की बदबू मरते कमीज़ को खोलकर सोया २१-८-९७
तो सुबह ही उठा |हालाँकि रात नींद की खुमारी में खलल पड़ा था जब कोई टोर्च लेकर महिला व पुरुष आए थे और मुझे सोया जान कर वापस चले गए थे| सुबह कांतिलाल दवे के साथ जंगल की ओर गया |वापस आकर दाड़ी बनाई और नहाया| आठ बजे चाय परांठों का नाश्ता कर के समीक्षा बैठक में पहुंचा| अभी तीसरे व चौथे दिन की चर्चा थी जो पौने बारह बजे तक जारी रही | फिर कुछ देर पेपर देखे| दोपहर में खाने के बाद भाटी के साथ स्टेशन गया और चाय के साथ यहाँ का प्रसिद्ध मावा खाया| २-२० बजे से फिर चर्चा शुरू हुई और जल्दी ही पूरा कार्य कर के टी ए बिल्स भरे| उपस्थिति पत्र लेकर चले ही थे कि अकाऊंटैंट आ गया चार बजे तक फार्म भरवाये | फिर भुगतान किया|पांच वाली बस के लिए कैम्पस से चले पर ट्रेन से जयपुर जाने का मानस बनाया| समय गुज़ारने के लिए ५-२० से ये पंक्तियाँ लिखनी शुरू की | अब ६-२० हो रहे हैं | मुसाफिर खाने की बेंच पर बैठा यह लिख रहा हूँ| तिलोनिया पहुँचने का गाड़ी का सही समय ६-४१ है| गाडी सात बजे पहुंची| इस बीच पास के ढाबे पर से चाय-मावा लिया| इस ट्रेन को यहाँ के लोग 'देवगौड़ा' कहते हैं | गाड़ी जयपुर पहुंची तो एक इच्छा तो हनुमानगढ़ की बस पकड़ने की थी पर कुछ खरीददारी करना चाहता था | ज्यादा सनक हिंदी का शब्द कोष लेने की थी | मासी निर्मला के घर १०-३० पर पहुंचा|
२२-८-९७
साढ़े दस बजे चौड़ा रास्ता के लिए रवाना हुआ| शब्द कोष, माउथ आर्गन लिया| निन्नी के लिए लहंगा -चुन्नी ली |लस्सी पी और वाया रामबाग सर्किल रवि के पास पहुंचा| साढ़े पांच तक उसके साथ रहा जब उसने मुझे अशोक मार्ग स्थित चौराहे पर १७ नम्बर की बस के लिए छोड़ा| छः बजे मासी के घर से चला | पोलोविक्ट्री तक बस और फिर पैदल स्टेशन पहुंचा| टिकट ली, गाड़ी पकड़ी| गाड़ी का समय साढ़े सात से सवा सात का हो गया है|
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