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रविवार, 27 जून 2010

GUMNAMI

गुमनामी

नाम था मेरा भी
परिचित थे चेहरे सभी
समय के थपेड़े या
कंक्रीट का जंगल
उत्तरदायी है ?
मेरी गुमनामी के लिए
गुमनाम जो हुआ हूँ
नए-नए चेहरे हैं
अपनत्व उनमे ढूंढ़ता
अपने ही शहर में
अनजान हो गया हूँ
गुमनाम हो गया हूँ
[अन्तः स्वर में १९९४ में प्रकाशित]

1 टिप्पणी:

Amrita Tanmay ने कहा…

gumnam jo huye to
khud se pahchan ho gayi
sabko jankar bhi
anjan ho goye
chalo achchha hua
khud ko jankar ham
kitne hairan ho gaye