राखी [लघु कथा]
राखी रे दिन कजली आपरे भाई खने राखी बान्धन पुगेड़ी ह़ी |
अडिकता अडिकता सिंझया होगी पण बीरो नी आयो तो भौजाई बोली
''थे राखी अठै ह़ी मेल जावो नी तो बेटैम हो जाओला, थे तो जानो हो क
अठै थोड़ी जिग्याँ में सारा ने मोकली दिक्कत होवेला , बियारो तो टैम
बेटैम के ठा कद आवेला |'' कजली ठगी ज्योड़ी सी हाल सकन जोगी ह़ी कोनी रइ |
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