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मंगलवार, 17 फ़रवरी 2015

शिक्षिका बच्चों की परीक्षा तैयारी के लिए सामग्री की खोज अंतर्जाल पर करतीं। कई बच्चोंके मार्फ़त बात अभिभावकों तक पहुंची। बूमरैंग की भांति बात वापस लौट कर स्कूल परिसर तक आ गयी। विद्यालय मुखिया को शिकायत की गयी। मैडम सारा दिन फ़ोन से चिपकी रहती हैं। कुछ पूछने पर भी मोबाइल फ़ोन से देख कर बतातीं हैं। उधर थोड़े समय बाद विभाग ने नवीनतम तकनीकों से विद्यार्थियों के लिए सीखने के अवसर उपलब्ध कराये जाने पर ज़ोर दिए जाने के आदेश भी जारी कर दिए। शिक्षिका के नवाचारों पर विभागीय मुहर लग गयी थी। अब तो सभी उन से कुछ न कुछ प्राप्ति की उम्मीद में रहतीं। बस इतना ध्यान रखते कि दूसरे को इस कृपा प्राप्ति का भान न हो। ...परीक्षा की दृष्टि से महत्व की सामग्री की खोज करते एक शिक्षक संघ की साईट से सैम्पल प्रश्नपत्र खोजे। अपने विषय के प्रश्न विद्यर्थियों को नोट भी करवाये। रिसती हुई बात अन्य शिक्षकों तक पहुंची। स्टाफ़ में से किसी के स्टेशनरी शॉप भी थी। अब अंतर्जाल तो साम्य रूप से सभी के लिए उपलब्ध है। शॉप वाले ने सभी विषयों के प्रश्न पत्रों का सेट बनाया। बल्कि कई सेट बनाये और बाइंड किये आकर्षक बाइंडिंग में और बेचे तीस तीस रूपये में। किसी को याद आया।... माल मालिकों का मशहूरी कंपनी की।©

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