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yadavinod

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रविवार, 14 दिसंबर 2014

मै

बोतल में समा नहीं रही मै
बोतल को आज चढ़ गई मै
नशा मानो हर सू तारी है
चढ़ रही कैसी ये ख़ुमारी है
आब ओ हवा में घुल गई मै...
ख़लाई परवाज़ी कर गई मै©

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