ये कड़छी तो मैं ले के जाऊंगी जब बंटवारा होगा, जैसे ही छोटी ने कहा तो कड़छी मानो सजीव बन गई उसका गोल भाग सिर और हत्था धड़ बन गया. वह बोल उठी, जो मुझे बाज़ार से ख़रीद कर लाया वो तो अभी जीवंत है...पर निर्जीव समझी जाने वाली की कौन सुनें जब जीवित को ही सुनना बोझ लगे©
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