रूतबो [लघु कथा]
ब्याव री चमक चाँदनी म लिप्योड़े पोत्योड़े मूंडा बिचाले प्रशासनिक अफसर धाकड़ साब भी हा
मिजमान दोस्त भायला रो परिचय करांवतो हो............... !
'' ए डॉक्टर साब, ए ठेकेदार साब,..................... अर ए माट साब!''
माट साब कैवतां ही धाकड़ साब रो हाथ लारे सरकतो हो क मिजमान आपणी बात पूरी करी !
''माट साब आपणे फलाने नेताजी रा भांजा है !'' अच्छा - अच्छा कैवतां धाकड़ साब रे लटक्योडे हाथ
में जान आगी अर बो माट साब रे हाथ सूं चिमटगयो !
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