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सोमवार, 10 मई 2010

रुतबो

          रूतबो [लघु कथा]
ब्याव री चमक चाँदनी म लिप्योड़े पोत्योड़े  मूंडा बिचाले प्रशासनिक अफसर धाकड़ साब भी हा

मिजमान दोस्त भायला रो परिचय करांवतो हो............... !
'' ए डॉक्टर साब, ए ठेकेदार साब,..................... अर ए  माट साब!''
माट साब कैवतां ही धाकड़  साब रो हाथ लारे सरकतो हो क मिजमान आपणी  बात पूरी करी !
''माट साब आपणे फलाने नेताजी रा भांजा है !'' अच्छा - अच्छा कैवतां धाकड़  साब रे  लटक्योडे   हाथ
 में जान आगी अर बो माट साब रे हाथ सूं चिमटगयो  !

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