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शुक्रवार, 14 मई 2010

AARAMKHOR

आरामखोर [लघु कथा ]
शुकदेव जद प्राइवेट स्कूल में होया करतो तो सोच्या करतो क  जे सरकारी नौकरी लाग गया तो पछे
गाँव में ह़ी रह्स्या अर टाबरा  ने जोर री मेहनत करा स्या | सग्लां ने भनास्या |
...अबार बीं ने सरकारी स्कूल में मास्टर बन्योडा ने पांचवी बरस लाग गी है |
बो स्कूल सात हाली टैम में पूणी आठ पूगे अर टाबरा ने आधी छुटी सारी कर देवे|
सरकारी नौकरी बीं नै आराम खोर बना दीनो है !

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