hit counter

yadavinod

पृष्ठ

मंगलवार, 11 मई 2010

AANKH AUR SAPNE

आँख और सपने
आँख, छोटी-बड़ी
चाहे जैसी नहीं होती
कुदरती होती है
आँखे चाहे कीच भरी
आँखे चाहे मिची-मिची हो
लाल डोरों वाली हो
या फिर पीली हो
खुली या उनींदी हो
सीधी या टेढ़ी  हो
रौशनी भरी  या
अँधेरी हो
सूखी या पनीली हो
हर आँख में चमक हो न हो
पर ज़रूर होते है सपने
सपने भरी आँखे देखो
कितनी सुन्दर दिखती हैं

1 टिप्पणी:

Amrita Tanmay ने कहा…

बेहतरीन रचना ........ शुभकामनायें .......