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yadavinod

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रविवार, 3 मई 2015

जीवन शैली में बहुत बदलाव आ गया था। बाल काटने की बड़ के पेड़ के नीचे की लोहे की छोटी पेटी जिसमें कैंची उस्तरा मशीन ब्लेड्स कंघिया ब्रश होते थे और ऊपर के एक कुंडे से उठाई जा सकने वाली पोर्टेबल से ब्यूटी पार्लर में तब्दील हो गयी थी।बड़े बड़े दर्पणों वाले कमरे। घूमने वाली कुर्सियां। कई तरह के पोतने पोतन वाले डिब्बियां ट्यूब्स। बड़ी सी बिल्डिंग। वो भी शहर के केंद्र में बाज़ार के बीचो बीच। सच्चाई नेकदिली सहयोग प्यार मोहब्बत जैसी आंतरिक सुंदरता के बदले बाहरी सुंदरता की समाज में पूछ होने लगी थी। कुदरती बालों के साथ ऐसा व्यवहार जतलाया जाने लगा मानो दुनिया में सबसे बड़े सुंदरता के दुश्मन वो अनचाहे बाल ही हैं। इसी हीनभावना को एनकेश किया जाता और जेब पर हमला किया जाता। प्रत्येक घर से गोपनीय ख़ज़ाने का कुछ भाग गैरकुदरती दाड़ी बनाने मुंह को अलग अलग तरह के ट्यूब्स में भरे मसाले से पुतवाने में खर्च होता। महानगरों के कुछ विशेष पार्लर से ट्रेनिंग के झूठे सच्चे सर्टिफिकेट भी लगाये जाते जिससे लोगों में और भी खिंचाव पैदा होता था। थ्रेडिंग वैक्सिंग ब्लीचिंग आदि लुभावने शब्दों का प्रयोग बातों में होता चाहे अँगरेज़ी में होने के कारण वे समझ आये या न आये। लोग जेब कटा के भी ठगी के अहसास को मन में दबा कर ही पारलर से बाहर निकलते और फिर और भी ग़म है ज़माने में सुंदर दिखने के सिवा की तर्ज़ पर भूल जाते। अघोषित और बिना हिसाब की आय पर कर वाले विभागों की या तो नज़र नही पड़ती थी या उनकी नज़रें इनायत होती होंगी। पारलर के संचालक को अब विशिष्ट अतिथि बनाकर सार्वजनिक कार्यक्रमों में बुलाया जाने लगा था। सब कुछ सही ही चल रहा था। स्टेशन के पास ही ट्रेन से उतर कर बाल कटाने की गरज़ से एक व्यक्ति पारलर में घुसा। कटिंग के बाद बोला गया उसे मसाज भी करवाओगे। कर दो। सब हुआ तो पूछा। कित्ते हुए ? 1400 ओनली। क्या ? कटिंग और मालिश के इतने? हमने मालिश नही मसाज की है। ये देखो कितने रूपये का तो मसाज मसाला लगाया है। मुंह को अंग्रेजी के एक्सेंट के इर्द गिर्द मुंह बनाते हुए पारलर संचालक बोला।
मैं पुलिस बुला लूंगा। ग्राहक बोला।
 पुलिस तो हम जेब में रखते हैं। संचालक बोला।
तू मैं बढ़ी तो आसपास के दुकानदारो या भीड़ में से किसी ने पुलिस को फ़ोन कर दिया शांति भंग की आशंका में। इसके बाद गाड़ी आई। ग्राहक संचालक दोनों को बिठा ले गयी।©