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रविवार, 14 दिसंबर 2014

किस को याद
कौन कहां से आए
कौन अपने-पराए
खाते-पीते भी तो
सोचते हैं ना...
आधी जिंदगी तो
बीत ही जाती है
सोते-सोते
फिर फिर सोना
सोना भी तो
मरने जैसा है ना
कहां पता होता हैं
कहां कैसे पड़े हैं
फिर जब
लंबी नींद सोएंगे
तो कहां उठ पाएंगे
हम सोएंगे तो
दूजे कुछ देर
दुख पाएंगे या नहीं
पर जताएंगे जरूर
और फिर भूल जाएंगे

© विनोद यादव

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