ओढणी
सतरंगी ओढणी
सुपातर बीन्दनी
ठेठ देहाती रंग
ओढ़नी साक्षी है...
जिजीविषा की जंग की
ओढ़नी को खुद से
ज्यादा लगाव है
अपने पास के
दूर के रिश्तों का
जिनके लिए पचती है
रैन और दिवस
क्योंकि
उसे मालूम है
उसकी ओढ़नी के रंग
भी उन रिश्तों के कारण हैं
जिस दिन नहीं रहेंगे
ओढणी के रिश्ते
बदरंग हो जायेंगे
उस ओढणी के रंग
सतरंगी ओढणी
सुपातर बीन्दनी
ठेठ देहाती रंग
ओढ़नी साक्षी है...
जिजीविषा की जंग की
ओढ़नी को खुद से
ज्यादा लगाव है
अपने पास के
दूर के रिश्तों का
जिनके लिए पचती है
रैन और दिवस
क्योंकि
उसे मालूम है
उसकी ओढ़नी के रंग
भी उन रिश्तों के कारण हैं
जिस दिन नहीं रहेंगे
ओढणी के रिश्ते
बदरंग हो जायेंगे
उस ओढणी के रंग
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