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रविवार, 14 दिसंबर 2014

ओढणी

ओढणी
सतरंगी ओढणी
सुपातर बीन्दनी
ठेठ देहाती रंग
ओढ़नी साक्षी है...
जिजीविषा की जंग की
ओढ़नी को खुद से
ज्यादा लगाव है
अपने पास के
दूर के रिश्तों का
जिनके लिए पचती है
रैन और दिवस
क्योंकि
उसे मालूम है
उसकी ओढ़नी के रंग
भी उन रिश्तों के कारण हैं
जिस दिन नहीं रहेंगे
ओढणी के रिश्ते
बदरंग हो जायेंगे
उस ओढणी के रंग

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