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yadavinod

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शनिवार, 25 जनवरी 2014

पापा छोड़ो सुस्तीआओ करें मस्तीबेटे को खेल भाया हैकुछ इस तरह ये मस्ताया हैखेल इस का परिभाषित नहींइसको तो चाहिए धींगामुश्तीहाथ लात घुमाएगालहराएगा चलाएगाजोर में बेहतरी दिखाएगाबेटी पढते हुए मौन सबदेख रही हैअचानक कहती हैबंद करो ये कोई खेल हैकोई खेलता हैइस तरैकिसी के लग जाएगीऐसी वैसी जगह©

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