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मंगलवार, 18 मई 2010

HEARD & FORWARDED

सुणी - सुणाई , आगे बढ़ाई
[१]
तोड़े दे हथ लाया , सारा टब्बर त्हाया
जब किसी को कोई काम करता देख लेता है तो व्यक्ति को स्वयं को भी सम्बंधित काम याद आ जाता है |
[२]
ककडिया दे चोर नू गोली नी मारीदी हुंदी |
किसी दोषी को उसके किये से ज्यादा सजा नहीं हो |
[३]
अख च सुरमा ता हर कोई पा लेंदा है पर पा के अख  मटकौण   किसी किसी नू ही आंदा है |
प्रतिभा का प्रदर्शन हर कोई  नहीं कर सकता |
[४]
आंगलियाँ  रे आल्कस मुछ्याँ मुंह में जावे|
आलसी मनुष्य के पास सुविधा होते भी उसका उपयोग नहीं करता है|
[५]
उड़ए   भिन्टोड़ा पूनिया रा   लेखा  |
व्यक्ति कई बार अनजाने में बड़ा नुक्सान भूल कर छोटे का शोक ज्यादा मानता है |

[६]
भंडा भंडोर्यिया तेरे किन्ना कु भार, इक मुट्ठी चक ले दूजी तैयार |
काम करने वाले के लिए फुर्सत के क्षण कभी नहीं मिलते, उसका एक कार्य ख़त्म होने पर दूजा तैयार रहता है |

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